नई दिल्ली 10-06-2026 : जब आप और हम चैन की नींद सोते है उस समय कुछ लोग होते है जो हमारे लिए अपनी रात की नींद खोकर उस समय भी रात भर जागकर संघर्ष करके हमारी और हमारी भारत माँ की रक्षा कर रहे होते है और उसके लिए अपने प्राणो की भी चिंता नहीं करते | ऐसे ही वीर और जांबाज अदम्य साहसिक वीरता का परिचय देने वाले लोगो को भारत सरकार हर साल (वीरता पुरस्कार ) gallantry awaaard देती है | हल ही में (Defence Investiture Ceremony) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के इन वीर बेटे-बेटियों को सम्मानित किया |
कब और किसे दिए जाते हैं ये सम्मान?
भारत में वीरता पुरस्कारों का इतिहास देश के गणतंत्र बनने के साथ ही 26 जनवरी 1950 से शुरू हुआ था। ये पुरस्कार मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटे जाते हैं:
युद्ध कालीन वीरता पुरस्कार (Wartime Gallantry Awards): यह दुश्मन के सामने युद्ध के मैदान में दिखाए गए साहस के लिए दिए जाते हैं। इसमें परमवीर चक्र (सर्वोच्च), महावीर चक्र और वीर चक्र शामिल हैं।
शान्ति कालीन वीरता पुरस्कार (Peacetime Gallantry Awards): यह सैन्य अभियानों से अलग, आतंकवाद विरोधी अभियानों, आपदा बचाव कार्यों या देश का गौरव बढ़ाने वाले किसी भी असाधारण साहसी कार्य के लिए दिए जाते हैं। इसमें अशोक चक्र (सर्वोच्च), कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र शामिल हैं।यह पुरस्कार सेना के तीनों अंगों (थल सेना, नौसेना, वायु सेना), अर्धसैनिक बलों, पुलिस कर्मियों और आपातकाल में अपनी जान की परवाह न करने वाले आम नागरिकों को भी दिए जा सकते हैं। इनकी आधिकारिक घोषणा साल में दो बार—26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) की पूर्व संध्या पर की जाती है।
इस साल का सबसे बड़ा पुरस्कार: अंतरिक्ष में इतिहास रचने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को
‘अशोक चक्र’इस वर्ष 2026 का सबसे बड़ा शांति कालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र, भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को दिया गया। यह पहला मौका है जब किसी अंतरिक्ष यात्री को उनके इस तरह के मिशन के लिए देश के सर्वोच्च शांति कालीन सैन्य सम्मान से नवाजा गया है।
क्यों मिला यह सम्मान?
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए ऐतिहासिक Axiom-4 मिशन में बतौर पायलट हिस्सा लिया था। वह अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने। इस बेहद जटिल और जोखिम भरे 18 दिनों के अंतरिक्ष मिशन के दौरान उन्होंने जिस मानसिक दृढ़ता, उत्कृष्ट नेतृत्व और अदम्य साहस का परिचय दिया, उसने वैश्विक स्तर पर भारत का मस्तक ऊंचा कर दिया। उनके इस साहसिक कदम ने देश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि वीरता सिर्फ सीमाओं की रक्षा में ही नहीं, बल्कि विज्ञान और खोज के नए क्षितिजों को लांघने में भी छिपी है।
मानवीय संवेदना और कर्तव्य की पराकाष्ठा
वीरता पुरस्कार सिर्फ धातुओं के बने पदक नहीं हैं, बल्कि यह उन परिवारों के त्याग की कहानी हैं जिन्होंने अपने बेटों और बेटियों को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया। इस साल के समारोह में जहां एक तरफ अंतरिक्ष में तिरंगा लहराने वाले शुभांशु शुक्ला की मुस्कान थी, वहीं दूसरी तरफ आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए वीर सपूतों के रोते और गर्व से तने हुए माता-पिता और पत्नियां भी थीं, जो अपने अपनों के मरणोपरांत पदक लेने राष्ट्रपति भवन के मंच पर पहुंचे थे।जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन वीरों की छाती पर पदक लगाए और शहीदों के परिजनों को गले लगाया, तो पूरा देश भावुक हो उठा। यह पुरस्कार इस बात का प्रतीक हैं कि भारत अपने देशरक्षकों के कर्ज को कभी भूल नहीं सकता। इन वीरों का साहस ही हमारी सुरक्षित सुबह की गारंटी है।
हाल ही में 8 जून को भी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 51 वीरो को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जिनकी खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है |

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