धीरज सेठ बने सेना प्रमुख, लोग खोज रहे जाति

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सहारनपुर/नई दिल्ली:
इस जून के महीने में भारतीय सेना में बड़ा बदलाव होने का ऐलान हुआ है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष (COAS) नियुक्त कर दिया है। सेना के मौजूदा उप प्रमुख (VCOAS) लेफ्टिनेंट जनरल सेठ आगामी 30 जून 2026 की दोपहर को अपना नया कार्यभार संभालेंगे। वह वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे, जो उसी दिन सेना से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

इंटरनेट पर योग्यता से ऊपर ‘जाति’ ढूंढने की होड़


लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की इस ऐतिहासिक नियुक्ति के बाद जहां एक तरफ देश को उनकी रणनीतिक सूझबूझ पर गर्व है, वहीं दूसरी तरफ इंटरनेट पर एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक ट्रेंड भी देखने को मिला है। गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग देश के नए सेना प्रमुख की योग्यता, उनके मेडल या उनकी वीरता के बजाय ‘धीरज सेठ की जाति’ (Dhiraj Seth Caste), ‘धीरज सेठ सरनेम पहचान’ और ‘धीरज सेठ किस समाज से हैं’ जैसे कीवर्ड्स धड़ल्ले से सर्च कर रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि समाज का एक हिस्सा आज भी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया है और किसी व्यक्ति की इतनी बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि को भी जाति के चश्मे से ही देखना चाहता है।

वर्दी का कोई धर्म या जाति नहीं: संकीर्ण सोच बदलने का वक्त


जातिवादी सोच रखने वाले लोगों को यह गहराई से समझना होगा कि भारतीय सेना (Indian Army) पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक, धर्मनिरपेक्ष और योग्यता-आधारित संस्थान है। जब एक सैनिक सीमा पर माइनस डिग्री तापमान में देश की रक्षा के लिए खड़ा होता है या गोली खाता है, तब वह किसी जाति विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा होता। सेना में कमान या प्रमोशन सिर्फ और सिर्फ कड़े अनुशासन, बेदाग ट्रैक रिकॉर्ड और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण (Merit and Seniority) के आधार पर तय किए जाते हैं। किसी जांबाज सैन्य अधिकारी की चार दशकों की तपस्या को उनकी जाति के दायरे में समेटना न केवल उनकी योग्यता का अपमान है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात एक करने वाली भारतीय सेना की धर्मनिरपेक्ष साख पर भी एक तरह की चोट है। समाज को अब इस संकीर्णता से ऊपर उठकर सेना प्रमुख को सिर्फ एक ‘सैनिक और सच्चे भारतीय’ के रूप में देखना सीखना होगा।

29 साल बाद आर्मर्ड कोर के पास आई कमान


सैन्य गलियारों में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की इस नियुक्ति को बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है। वह भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर (Armoured Corps) से ताल्लुक रखते हैं। साल 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के रिटायर होने के बाद से पिछले 29 सालों में यह पहला मौका है, जब आर्मर्ड कोर के किसी जांबाज अधिकारी को भारतीय सेना की कमान सौंपी गई है। बीते करीब तीन दशकों से इस शीर्ष पद पर आमतौर पर इन्फैंट्री (Infantry) या आर्टिलरी (Artillery) कोर के अधिकारियों का ही दबदबा रहा था।

मोर्चे पर बेदाग रिकॉर्ड और चार दशकों का लंबा तजुर्बा


दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर की मशहूर ‘2 लांसर्स’ रेजिमेंट से अपने सैन्य सफर की शुरुआत करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के पास लगभग 40 साल का एक लंबा, बेदाग और बेहद शानदार अनुभव है। उन्होंने भारतीय सेना की कई सबसे चुनौतीपूर्ण चौकियों और कमानों का सफल नेतृत्व किया है:

  • रेगिस्तान से लेकर पहाड़ों तक: उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट और सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया।
  • घाटी में आतंकवाद का खात्मा: जम्मू-कश्मीर में अशांत माहौल और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान उन्होंने काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स (CIF) का मोर्चा बेहद कुशलता से संभाला।
  • शीर्ष कमान भूमिका: थल सेनाध्यक्ष की कुर्सी संभालने से ठीक पहले वह सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) जैसी बेहद अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं।

उनकी इस बेमिसाल राष्ट्र सेवा और बहादुरी के लिए सरकार उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा पदक (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) जैसे बड़े सैन्य सम्मानों से नवाज चुकी है।

विदेशी धरती पर भी लोहा मनवा चुकी है इनकी रणनीतिक सूझबूझ


लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की सैन्य शिक्षा भी उतनी ही दमदार है, जितना उनका ऑन-फील्ड रिकॉर्ड। वह भारत के प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) और वियतनाम तथा पेरिस (फ्रांस) में होने वाले बेहद नामी ‘कमांड एंड स्टाफ कोर्स’ की पढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं, जिससे उन्हें वैश्विक सैन्य रणनीतियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों की बहुत गहरी समझ है।

रगों में दौड़ती है देशभक्ति: पिता राज्यपाल और भाई नौसेना में अफसर


देश की सेवा करना लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के पूरे परिवार की पहचान रही है। उनके पिता, लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ (सेवानिवृत्त), भारतीय सेना के पूर्व एडजुटेंट-जनरल रह चुके हैं। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। सिर्फ पिता ही नहीं, बल्कि उनके सगे भाई रियर एडमिरल रवनिश सेठ भी भारतीय नौसेना (Indian Navy) में एक बेहद वरिष्ठ and सम्मानित पद पर देश की सुरक्षा में तैनात हैं।

नए सेना प्रमुख के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?


30 जून 2026 से भारतीय सेना की बागडोर अपने हाथों में लेने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के कंधे पर कई बड़ी रणनीतिक जिम्मेदारियां होंगी। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को रफ्तार देना, थिएटर कमान (Theater Commands) के गठन की प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करना और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की सीमाओं को अभेद्य बनाए रखना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।

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Randeep Rana

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