अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी और रोज़-रोज़ की भागदौड़ से थक चुके हैं और सहारनपुर से हरिपुरधार शांत, ठंडी और धार्मिक जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह वीकेंड आपके लिए बेहद खास होने वाला है। अमूमन हम लोग पहाड़ों के नाम पर मसूरी या देहरादून निकल जाते हैं जहाँ भारी ट्रैफिक और भीड़ मिलती है।
लेकिन आज हम आपको हिमाचल प्रदेश की एक ऐसी छिपी हुई जन्नत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सहारनपुर से बेहद नज़दीक है। हम बात कर रहे हैं रेणुका जी (Renuka Ji), रहस्यमयी जामदग्नि आश्रम और बादलों के बीच बसे हरिपुरधार (Haripurdhar) माँ भंगायनी मंदिर की।
यहाँ की यात्रा अध्यात्म, एडवेंचर और शिमला जैसे ठंडे मौसम का एक अनोखा संगम है। आइए जानते हैं इस खूबसूरत ट्रिप का पूरा रूट और प्लानिंग:
सफर की शुरुआत: सहारनपुर से रेणुका जी (श्री रेणुका जी झील)
सहारनपुर से सुबह-सुबह अपनी गाड़ी या बाइक उठाकर आप बेहट और शाकुंभरी देवी मार्ग या पोंटा साहिब के रास्ते बेहद खूबसूरत वादियों का मज़ा लेते हुए श्री रेणुका जी पहुँच सकते हैं। सहारनपुर से हरिपुरधार
जाते हुवे रेणुका जी की दूरी महज़ 2.5 से 3 घंटे की है।
क्या है खास: यहाँ भारत की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील (Natural Lake) है, जिसका आकार एक सोई हुई महिला जैसा दिखता है। यह झील भगवान परशुराम की माता रेणुका जी को समर्पित है।
क्या करें: झील के शांत पानी में बोटिंग का आनंद लें, किनारे बने भव्य मंदिर में माथा टेकें और यहाँ मौजूद मिनी ज़ू (चिड़ियाघर) की सैर करें। यहाँ चारों तरफ फैली हरियाली आपका दिल खुश कर देगी।
अगला पड़ाव: प्राचीन जामदग्नि आश्रम (महज़ कुछ किलोमीटर दूर)
माता रेणुका जी के दर्शन करने के बाद, झील से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों के बीच स्थित है महर्षि जामदग्नि आश्रम। महर्षि जामदग्नि, भगवान परशुराम के पिता और माता रेणुका के पति थे।
क्यों जाएं यहाँ: यह जगह बेहद शांत और प्राचीन है। यदि आप कुछ पल सुकून के, प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं, तो यह आश्रम सबसे बेस्ट है। यहाँ का वातावरण आपको एक अलग ही मानसिक शांति का अहसास कराएगा। पौराणिक कथाओं और इतिहास में रुचि रखने वाले सहारनपुर वासियों के लिए यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।
आखिरी और सबसे खूबसूरत मंज़िल: हरिपुरधार और माँ भंगायनी मंदिर
अब समय आता है असली पहाड़ी रोमांच का! जामदग्नि आश्रम और रेणुका जी से आगे बढ़ते हुए जब आप पहाड़ों की घुमावदार चढ़ाई तय करेंगे, तो आप पहुँचेंगे हरिपुरधार (Haripurdhar)। सहारनपुर से कुल मिलाकर यह दूरी लगभग 153 किलोमीटर है, जिसे तय करने में करीब 4 घंटे 40 मिनट लगते हैं।
शिमला जैसा ठंडा मौसम
जैसे ही आप हरिपुरधार की वादियों में एंट्री करेंगे, आपको सहारनपुर की गर्मी का नामोनिशान नहीं मिलेगा। यहाँ का तापमान बहुत कम रहता है और अक्सर गर्मियों में भी शाम के समय हल्की जैकेट या चादर की ज़रूरत पड़ जाती है। चारों तरफ पहाड़ों पर तैरते हुए बादल (Clouds) आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे।
माँ भंगायनी देवी मंदिर (Maa Bhagyayni Temple): हरिपुरधार की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित माँ भंगायनी का यह ऐतिहासिक मंदिर बेहद खूबसूरत और भव्य है। देवी माँ भंगायनी को भगवान शिरगुल महाराज (शिवांश) की अनन्य भक्त माना जाता है। मंदिर परिसर से दिखने वाला पहाड़ों का 360-डिग्री व्यू और गहरी खाइयाँ आपका दिल जीत लेंगी। यहाँ आकर ऐसा लगता है मानो आप बादलों के ऊपर खड़े हैं।
सहारनपुर के लोगों के लिए क्यों बेस्ट है यह ट्रिप?
कम बजट और कम समय: जहाँ मसूरी जाने में पूरा दिन ट्रैफिक में निकल जाता है, वहीं हरिपुरधार आप मात्र 5 घंटे में आराम से पहुँच सकते हैं।
धार्मिक और प्राकृतिक ट्रिप: एक ही यात्रा में आपको देश की सबसे पवित्र झील, प्राचीन ऋषि आश्रम और माँ दुर्गा के स्वरूप माँ भंगायनी के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।
भीड़भाड़ से दूर सुकून: यह जगह अभी भी कमर्शियल टूरिज्म से बची हुई है, इसलिए यहाँ आपको शांति और शुद्ध पहाड़ी हवा मिलेगी। इतना कुछ आपको सिर्फ सहारनपुर से हरिपुरधार मार्ग पर मिलेगा |
कैसे पहुँचें (सहारनपुर से रूट)
सहारनपुर ➔ बेहट ➔ पोंटा साहिब/नाहन ➔ रेणुका जी ➔ जामदग्नि आश्रम ➔ हरिपुरधार।
तो फिर देर किस बात की? इस वीकेंड अपनी फैमिली या दोस्तों के साथ प्लान बनाइए, गाड़ी की टंकी फुल कराइए और निकल पड़िए हरिपुरधार की ठंडी वादियों में माँ भंगायनी का आशीर्वाद लेने!
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–Randeep Rana
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